मिलजुल कर 24 मार्च को विश्व क्षयरोग दिवस मनाएँ

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टीबी उन्मूलन में भारत सरकार का हाथ बटाएँ
जागरूकता से ही क्षयरोग का उन्मूलन संभव
इस वर्ष की थीम है “दी क्लॉक इस टिकिंग”
वाराणसी, 23 मार्च 2021
विश्व क्षयरोग दिवस, विश्व तपेदिक दिवस, विश्व टीबी दिवस, यह सभी दिवस प्रत्येक वर्ष 24 मार्च को अलग-अलग नामों से मनाए जाते हैं। लेकिन सभी का उद्देश्य वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाना है । टीबी का पूरा नाम ‘ट्यूबरकुलोसिस’ है। यह एक संक्रामक रोग है और इसे प्रारंभिक अवस्था में ही न रोका गया तो जानलेवा साबित हो सकता है। यह व्यक्ति को धीरे-धीरे मारता है। इस दिवस के जरिये टीबी की समस्या के विषय में और इससे बचने के उपायों के विषय में बात करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही लोगों को इस बीमारी के विषय और रोकथाम के लिए कदम उठाने के लिए जागरूक किया जाता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ वीबी सिंह ने बताया कि इस वर्ष विश्व टीबी दिवस का विषय ‘दी क्लॉक इस टिकिंग’ यानि ‘घड़ी चल रही है’ निर्धारित किया गया है जिसका प्रमुख उद्देश्य टीबी की रोकथाम और उपचार तक पहुंच बनाना, निरंतर फॉलो-अप, जांच के लिए पर्याप्त संशाधन, निक्षय पोषण योजना के तहत आर्थिक मदद, सामाजिक तिरस्कार और भेदभाव को खत्म करने को बढ़ावा देना और लोगों को एक न्यायसंगत, अधिकार-आधारित और प्रतिक्रिया को बढ़ावा देना है।
डॉ वीबी सिंह ने कहा कि दुनिया में टीबी मुक्त करने के लिए वर्ष 2030 लक्ष्य रखा गया है जबकि भारत में इसका लक्ष्य वर्ष 2025 तय किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) ने एक संयुक्त पहल “FIND. TREAT. ALL. #EndTB” शुरू की है। यह पहल टीबी प्रतिक्रिया को तेज करने और देखभाल तक पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से डबल्यूएचओ ने यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की ओर समग्र ड्राइव के रूप में शुरू की है।
डबल्यूएचओ के मुताबिक वर्ष 2012 में दुनिया भर में 86 लाख लाख लोग टीबी रोग का शिकार हुए और जिनमें 13 लाख मौत हुई। हालांकि नये मामले पिछले दशकों के दौरान हर साल दो फीसदी की दर से कम हो रहे हैं। वहीं भारत में टीबी के सबसे ज्यादा मरीज हैं, कुल मरीजों के 26 फीसदी भारत में रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के मरीजों की ठीक ढंग से देखभाल नहीं होने के कारण यह तेजी से फैल रहा है।
जिला क्षय अधिकारी डॉ राहुल सिंह ने बताया कि देश, प्रदेश एवं जिला स्तर पर टीबी से निपटने के लिए राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसके तहत प्रत्येक मरीज के नजदीक एक डोट्स सेंटर बनाया गया है जिससे मरीज को दवा खाने में कोई परेशानी न आए और वह अपना सम्पूर्ण घर पर ही रहकर ठीक कर सके। इसके साथ ही कार्यक्रम के अंतर्गत सक्रिय टीबी खोज अभियान चलाया जा रहा है जिसमें घर-घर जाकर टीबी के छुपे मरीजों को खोजा जा रहा है और उनको इलाज पर रखकर ठीक किया जा रहा है।
डॉ राहुल सिंह बताते हैं कि टीबी के फैलने का एक मुख्य कारण इस बीमारी के लिए लोगों का सचेत न होना और इसे शुरूआती दौर में गंभीरता से न लेना है। टीबी किसी को भी हो सकता है, इससे बचने के लिए प्रारम्भिक अवस्था में ही रोकना इसका बचाव है। इसके अलावा जन्म के तुरंत बाद या छः माह बाद शिशु को बीसीजी का एक टीका क्षयरोग से बचाता है। यह टीका सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर निःशुल्क लगाया जाता है ताकि देश की भावी पीढ़ी को क्षयरोग से बचाया जा सके।
वह बताते हैं कि यूनिवर्सल ड्रग एक्सेप्टेबिलिटी में टीबी के मरीजों के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है जिसके लिए जिले में आधुनिक मशीनों जैसे सीबी नाट, ट्रू नाट, एलपीए एवं कल्चर एक्टिविटी व ड्रग एक्सेप्टेबिलिटी लैब में तपेदिक की दवाओं व कीटाणुओं के बारे में जानकारी की जाती है एवं तदनुसार दवाओं में फेरबदलकर कारगर दवाएं मरीज को खिलाई जाती हैं। वहीं इन मशीनों के जरिये ड्रग रेसिस्टेंस, मल्टी ड्रग रेसिस्टेंस और एक्सट्रीम ड्रग रेसिस्टेंस के बैक्टीरिया के बारे में जानकारी ली जाती है।

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