महिला सशक्तिकरण की आवश्यकताएं क्यों? – डॉ अनीता सिंह

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महिला सशक्तिकरण शब्द का प्रयोग सरकारी तंत्र में हाल ही में शुरू हुआ है । यदि हम इतिहास के पत्रों को उल्टाऍ तो सरकारी योजनाओं की प्रथम सोच “महिला विकास” फिर “महिला सहयोग” से गुजरते हुए , अब महिला सशक्तिकरण पर आ पहुंची है । यह हमारी मानसिकता के परिपक्व होने का उदाहरण माना जा सकता है। सशक्तिकरण एक मानसिक अवस्था है, जो कुछ विशेष आंतरिक कुशलताओं एवं सामाजिक परिस्थितियों पर निर्भर है, जिसके लिए समाज में कानून और सुरक्षा का होना आवश्यक है।


दिनचर्या के नीरस और कमरतोड़ कामों से मुक्ति, आर्थिक आत्मनिर्भरता एवं उत्पादन क्षमता, देशाटन की सुविधाएं, निर्णय का अधिकार, सत्ता एवं संपत्ति में पुरुष के बराबर हक और साथ ही ऐसी शिक्षा जो औरत को परिपक्व बनाये वही महिला सशक्तिकरण है।
धरती पर ईश्वर द्वारा अनूठी, अनुपम संरचना का सकार रुप है,महिला । महिला कभी मां बनकर, कभी पत्नी के रुप में, कभी भगिनी के रूप में और कभी पुत्री के रूप में अपने स्नेह के महत्व को वर्षों से समर्पित करती आ रही है। समाज के आधे वर्ग का निर्माण महिला के द्वारा ही किया जाता है। महिला को आदर्श की प्रतिमूर्ति एवं परिवार की देखभाल की जिम्मेदारी से युक्त माना जा जाता रहा है। उसका क्षेत्र प्राचीन काल से ही विभिन्न क्षेत्रों में सीमित रहा है किन्तु आज हम सभी महिला को अबला नहीं सबला के रूप में जानते हैं।
आज इसलिए आवश्यकता महसूस की जा रही है कि महिलाओं की स्थिति में सुधार करके उंहें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। इसके लिए सरकार द्वारा भी अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। जिनमें से प्रमुख है:-
1) महिला की शिक्षा पर बल देना,
2)कन्या भ्रूण की हत्या प्रतिबंध लगाना,
3)महिला आरक्षण की व्यवस्था करना।
शिक्षा के माध्यम से एक व्यक्ति ज्ञान, कौशल, जीवन मुल्य और दृष्टिकोण हासिल करता है, उससे वह अपने जीवन को खुशहाल बना सकता है।एक पुरानी कहावत है कि यदि एक पुरुष शिक्षित होता है, तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है, लेकिन यदि एक महिला शिक्षित होती है तो पूरा परिवार शिक्षित होता है इसीलिए ऐसा माना जाता है कि यदि कोई राष्ट्र महिला शिक्षा को महत्व दे रहा है तो वह अपने भाभी जीवन को भी सुधार है।
विश्व विकास रिपोर्ट 1998-99 में इस बात का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, कि महिला शिक्षा आर्थिक विकास में सहायक होने के साथ ही प्रजनता को कम करने, बच्चों के उचित पालन – पोषण एवं उनके बेहतर स्वास्थ को बनाये रखती है।
यदि विकासशील राष्ट्रों को अपनी गरीबी दूर करनी है, तो महिलाओं को शिक्षित एवं आत्मनिर्भर बनाने के कार्य को प्राथमिकता देनी होगी।
कन्याभूर्ण हत्या की विभिषका को रोकने के लिए महिला का प्रत्येक क्षेत्र में सशक्त होना अत्यंत आवश्यक है।
महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए महिला आरक्षण की व्यवस्था करनी होगी।
सशक्त समाज सशक्त नारी पर निर्भर करता है। आवश्यकता है, तो रानी लक्ष्मीबाई, मदर टेरेसा एवं कल्पना चावला आदि जैसों जैसी महानहस्तियां से प्रेरणा लेकर नारी की दशा में सुधार कर उसे अबला से सबला बनाने की। महिला अपनी बागडोर खुद संभाले जिससे वह सशक्त बन सके।

साल 2021 की बात की जाए तो इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को ‘Women in leadership: an equal future in a COVID-19 world’ की थीम पर मनाया जा रहा है. महिला नेतृत्व: COVID-19 की दुनिया में एक समान भविष्य को प्राप्त करना’ विषय कोविड परिस्थितयों के बीच चुना गया है. गौरतलब है कि इस वर्ष यह थीम COVID-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य देखभाल श्रमिकों, इनोवेटर आदि के रूप में दुनियाभर में लड़कियों और महिलाओं के योगदान को हाईलाइट करने के लिए रखी गई है.

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