पुलिस कर्मी और बीजेपी पदाधिकारी के बीच मारपीट का मामला, अधिकारियों ने की नजीर पेश करने वाली कार्रवाई, जाने क्या हुआ ऐक्शन

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वाराणसी। लंका थाना क्षेत्र के सुंदरपुर में बीजेपी नेता और पुलिसकर्मियों में हुई हाथापाई के बाद कोर्ट ने बीजेपी नेताओं को जमानत पर रिहा कर दिया। इसके बाद रविवार को जिले के एसएसपी ने लंका थाने से संबंधित कुछ पुलिसकर्मियों के ऊपर भी कार्रवाई की है। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने गलत धाराओं में मुकदमा दायर कर बीजेपी नेताओं को जेल भेजने की कोशिश की थी, जो सीओ भेलूपुर की विवेचना में गलत पाए गए और इसी कारण कोर्ट से बीजेपी नेताओं को जमानत मिल गई।

जानकारी के मुताबिक मजिस्ट्रेट जांच में पुलिस के अधिकारी भी गलत पाए गए। सूत्रों की मानें तो जांच में इस बात का भी प्रमाण मिला कि पुलिसकर्मियों ने गलत धाराओं में मामला दर्ज किया था। उधर बीजेपी नेताओं को कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जिले में पुलिस विभाग की जमकर किरकिरी हुई है। उसके बाद जिले के एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने पुलिसकर्मियों के ऊपर कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। वहीं सीओ भेलूपुर त्रिपाठी को पुलिस आफिस से संबद्ध कर दिया है। इस मामले में लंका थानाध्यक्ष और सुंदरपुर कार्यवाहक चौकी इंचार्ज समेत 5 को लाइन हाजिर कर दिया है।

दरअसल मामला बीते शुक्रवार का है, जब लंका थाना क्षेत्र के सुंदरपुर इलाके में चौकी इंचार्ज सुनील गौड़ को सूचना मिली कि चौराहे पर शहजाद नाम का व्यक्ति किसी को डरा धमका रहा है। सूचना मिलते ही मौके पर फैंटम दस्ता पहुंच गया और मामले की छानबीन करने लगा। आरोप है कि वहां मौजूद बीजेपी नेता और जिला पंचायत सदस्य सुरेंद्र पटेल के बेटे विकास पटेल के साथ अन्य लोग भी पुलिस के पास पहुंच गए। इसके बाद पुलिस कर्मियों ने उनसे मास्क नहीं लगाने का कारण पूछा। वही विकास पटेल ने भी पुलिसकर्मियों से मास्क नहीं लगाने को लेकर सवाल पूछना शुरू किया। आरोप है कि पुलिस कर्मी भी मास्क नहीं लगाए थे, जिसके बाद मामला तूल पकड़ना शुरू हुआ। नौबत मारपीट और गाली गलौज तक आ गई। कार्यवाहक चौकी इंचार्ज को भी इस बाबत सूचना दी गई। जिसके बाद सीओ भेलूपुर प्रीति त्रिपाठी, लंका थाना अध्यक्ष, सुंदरपुर चौकी इंचार्ज सुनील गौड़ समेत थाने की फोर्स मौके पर पहुंच गई। उधर इस बाबत जानकारी सुरेंद्र पटेल को भी हो चुकी थी वह भी घर से निकल कर नोकझोंक वाले स्थान पर पहुंच गए।

मौके पर पहुंची फोर्स सभी को लंका थाने लेकर आई । थाने पर एसपी सिटी विकास चंद्र त्रिपाठी भी पहुंच गए और वहां पंचायत शुरू हो गई। थोड़ी ही देर में बीजेपी के अन्य नेता भी थाने पर पहुंच गए। पुलिस ने इस मामले में सात नामजद और एक अज्ञात के खिलाफ कुल 19 धाराओं में मामला दर्ज किया। जिसमें 307 हत्या का प्रयास, 392 लूट, 364 अपहरण जैसे संगीन मामले भी शामिल थे। इस बात को लेकर बीजेपी नेताओं ने विरोध किया कि मामला केवल हाथापाई और गाली-गलौज तक का ही था। इसमें गलत धाराओं में मुकदमा क्यों लिखा जा रहा है। लेकिन विरोध के स्वर के बीच भी मामला लंका थाने में दर्ज कर दिया गया। यह पूरा घटनाक्रम जिले के आलाधिकारियों के संज्ञान में था। मौके पर लंका थानाध्यक्ष और सीओ भेलूपुर भी पहुंच गई थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो भी पुलिस अधिकारियों तक पहुंच चुका था। फिर भी पुलिस ने गंभीर धाराओं में थाने में मामला दर्ज कर लिया।

इस मामले में शनिवार को पुलिस ने गिरफ्तार चार लोगों को कोर्ट में पेश किया, जिसमें एक अधिवक्ता भी शामिल थे। कोर्ट में लाते समय पुलिसकर्मियों को अधिवक्ताओं का विरोध भी झेलना पड़ा। वहीं दूसरी तरफ शनिवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेता सर्किट हाउस में मीटिंग कर रहे थे और पूरे मामले की जानकारी ले रहे थे। बीजेपी नेताओं ने पुलिस अधिकारियों से यह सवाल भी पूछा कि मामला जब हाथापाई और मारपीट का था, तो इतनी संगीन धाराओं में मामला क्यों दर्ज किया गया। बीजेपी की तरफ से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के बारे में भी पुलिस अधिकारियों से बात हुई। नेताओं ने बताया कि वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि दोनों तरफ से धक्का मुक्की और बहस हो रही है। फिर भी इस मामले में पुलिस ने गलत धाराओं में मुकदमा कैसे दायर कर दिया। इसके बाद बीजेपी के प्रदेश सह प्रभारी सुनील ओझा और काशी प्रांत के अध्यक्ष महेश चंद्र श्रीवास्तव के अनुरोध पर इस की मजिस्ट्रियल जांच भी बैठा दी गई। कोर्ट ने पुलिस कर्मियों को गलत धाराएं हटाकर विवेचना करने की बात कही और सभी आरोपियों को जमानत दे दी।

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